Tuesday, October 1, 2024

पोस्ट 02

 जान बची लाखों पाय l

जान हैँ तो जहान हैँ 

जितना ही गुड़ डालो, उतना ही मीठा

तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर 

जितने मुँह, उतनी ही बातें 

जिसका खाए उसका गाए 

जिसकी बनरी वही नचावे 

जिसकी लाठी उसकी भैंस 

जिसके पाँव न फटी बिवाई, वह क्या जान पीर पराई 

जिसे पिया चाहे वही सुहागन 

जैसा देश, वैसा भेस

जैसी करनी, वैसी भरनी 

जो गरजे सो बरसे नहीं

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